Monday, 25 July 2022

Ramayan song lyrics in Hindi

 

Mangal Bhawan Amangal hari Lyrics

मंगल भवन अमंगल हारी
द्रबहु सुदसरथ अचर बिहारी

सीता राम चरित अति पावन
मधुर सरस अरु अति मनभावन

पुनि पुनि कितनेहू सुने सुनाये
हिय की प्यास भुजत न भुजाये


Ram Lakhan Siya Vana Ko Jate Hain Ramayan Song Lyrics

ब्याकुल दशरथ के लगे
रच के पच पर नैन
रच बिहीन बन बन फिरे
राम सिया दिन रैन

विधिना ना तेरे लेख किसी की
समझ ना आते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिया
वन को जाते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिया
वन को जाते हैं

हो विधिना ना तेरे लेख किसी की
समझ ना आते हैं

एक राजा के रज दुलरे
वन वन फिरते मारे मारे

एक राजा के रज दुलरे
वन वन फिरते मारे मारे

होनी हो कर रहे करम गति
डरे नहीं क़ाबू के टारे

सबके कस्ट मिटाने वाले
कस्ट उठाते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिया
वन को जाते हैं

हो विधिना ना तेरे लेख किसी की
समझ ना आते हैं

उभय बीच सिया सोहती कैसे
ब्रह्म जीव बीच माया जैसे
फूलों से चरणों में काँटे
विधिना क्यूँ दुःख दिने ऐसे

पग से बहे लहू की धारा
हरी चरणों से गंगा जैसे

संकट सहज भाव से सहते
और मुसकते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिया
वन को जाते हैं

हो विधिना ना तेरे लेख किसी की
समझ ना आते हैं

हो विधिना ना तेरे लेख किसी की
समझ ना आते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिय
वन को जाते हैं

जन जन के प्रिय राम लखन सिया
वन को जाते हैं

Rasta Dekhat Sabri Lyrics

भीलनी परम तपश्विनी शबरी जाको नाम
गुरु मतंग कह कर गए तोहे मिलेंगे राम

कब दर्शन देंगे
कब दर्शन देंगे राम परम हितकारी
कब दर्शन देंगे दीन हितकारी
रस्ता देखत शबरी की उम्र गयी सारी
रस्ता देखत शबरी की उम्र गयी सारी

कहीं कोई कांटा प्रभु को नहीं चुभ जाये
पग तन्मग्चारे चुन चुन पुष्प बिछाए
मीठे फल चख कर
मीठे फल चख कर नित्य सजाये थारी
मीठे फल चख कर नित्य सजाये थारी
रस्ता देखत शबरी की उम्र गयी सारी


Bharat Sam nahi Duja Koi Tyagi Lyrics in Hindi

भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी
राम लखन सिया वन में
भरत भये घर ही में बैरागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी

भूषण बसन भूब सुख भोरे
मन तन बचन तजेतन तोरे

कहीं पुन बसत भरत बीनू रागा
चँचरित जीवी चंपक बागा
जेही अनुराग विराग का संगम बैरागी अनुरागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी

नंदी गाँव करी बरन कुटीरा
किंह निवास धरम धुरि धीरा

जाटा जुट सिर मुनि पट धारी
मही खन कुशसा खरी सवारी
बशन बसन बासन ब्रित नेमा
किन्हें रघुवर लागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी
भरत सम नहीं दुजा कोई त्यागी

नीत पूजत प्रभु पावरे
प्रीत न हृदय समात
माँगी माँगी रसु करत
राज काज बहु भाँति

Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dham

ॐ श्री महा गनाधि पते नमः
ॐ श्री उमामहेश्वरा भ्या नमः
वाल्मीकि गुरुदेव ने
कर पंकज तीर नाम
सुमिरे मात सरस्वती
हम पर हो खुद सवार

मात पीता की वंदना
करते बारंबार
गुरुजन राजा प्रजाजन
नमन करो स्वीकार

हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की
हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

No comments:

Post a Comment