नीले नीले अम्बर पर, चाँद जब आये
प्यार बरसाए, हमको तरसाए
ऐसा कोई साथी हो, ऐसा कोई प्रेमी हो
प्यास दिल की बुझा जाए
ऊँचे-ऊँचे परबत जब चूमते हैं अम्बर को
प्यासा-प्यासा अम्बर जब चूमता है सागर को
प्यार से कसने को, बाहों में बसने को
दिल मेरा ललचाये, कोई तो आ जाए
ऐसा कोई साथी हो…
ठण्डे ठण्डे झोंके, जब बालों को सहलाएं
तपती-तपती किरणें, जब गालों को छू जायें
साँसों की गर्मी को, हाथों की नरमी को
मेरा मन तरसाए, कोई तो छू जाये
ऐसा कोई साथी हो…
छम-छम करता सावन बूंदों के बान चलाये
सतरंगी बरसातों में जब तनमन भीगा जाए
प्यार में नहाने को, डूब ही जाने को
दिल मेरा तड़पाये, ख्वाब जगा जाए
ऐसा कोई साथी हो…
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