एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
दिल ही दिल में
जली जाती हैं
बिगड़ी बिगड़ी
चली आती हैं
झुंझलाती हुई
बलखाती हुई
सावन की सुनी रात में
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
डगमग डगमग
लहकी लहकी
भूली भटकी
बहकी बहकी
मचली मचली,
घर से निकली
पगली सी काली रात में
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
तन भीगा हैं
सर गीला हैं
उसका कोई पेंच भी ढीला हैं
तनती झुकती,
चलती रुकती,
निकली अंधेरी रात में
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
No comments:
Post a Comment