हम रूठे दिलों को मनाने में रह गए; गैरों को अपना दर्द सुनाने में रह गए; मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी; हम
दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।
क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!! तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है
दिल से खेलना तो हमे
भी आता है… लेकिन जिस
खैल मे खिलौना टुट जाए वो खेल हमे पसंद नही..
है दफ़न मुझमे कितनी
रौनके मत पूछ ऐ दोस्त…..हर बार उजड़
के भी बस्ता रहा वो शहर हूँ मैं!!
तेरी आँखों से यून
तो सागर भी पिए हैं मैने,तुझे क्या
खबर जुदाई के दिन कैसे जिए हैं मैने…
लिखना था की खुश हूँ
तेरे बिना पर आंसू ही गिर पड़े आँखों से लिखने से पहले।
हम रूठे दिलों को
मनाने में रह गए; गैरों को अपना
दर्द सुनाने में रह गए; मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी; हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।
क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे…!! तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है
दिल से खेलना तो हमे
भी आता है… लेकिन जिस
खैल मे खिलौना टुट जाए वो खेल हमे पसंद नही..
है दफ़न मुझमे कितनी
रौनके मत पूछ ऐ दोस्त…..हर बार उजड़
के भी बस्ता रहा वो शहर हूँ मैं!!
तेरी आँखों से यून
तो सागर भी पिए हैं मैने,तुझे क्या
खबर जुदाई के दिन कैसे जिए हैं मैने…
लिखना था की खुश हूँ
तेरे बिना पर आंसू ही गिर पड़े आँखों से लिखने से पहले।
हमें तो कब से पता
था कि तुम बेवफा हो बस तुझसे प्यार करते रहे कि शायद तुम्हारी फितरत बदल जाये।
तेरे सिवा कौन समा सकता है मेरे दिल में……रूह भी गिरवी रख दी है मैंने तेरी चाहत में !!
प्यार
करना हर किसी के बस की बात नहीं ….
जिगर
चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए।
मोहब्बत होने में
कुछ लम्हे लगते है .. पूरी उम्र लग जाती है उसे भुलाने में …
बड़ी हिम्मत दी उसकी
जुदाई ने ना अब किसी को खोने का दुःख ना किसी को पाने की चाह।
हजारो गम है सीने मे
मगर शिकवा करें किससे… इधर दिल है
तो अपना है… उधर तुम हो
तो अपने हो…
बड़ी अजीब सी मोहब्बत
थी तुम्हारी…… पहले पागल
किया..फिर पागल कहा..फिर पागल समझ कर छोड़ दिया..
मुझे
भी शामिल करो गुनहगारों की महफ़िल में , मैं
भी क़ातिल हूँ अपनी हसरतों का ,
मैंने
भी अपनी ख्वाहिशों को मारा है।
नाम तेरा ऐसे लिख चुके है अपने वजूद पर, कि तेरे नाम का भी कोई मिल जाए….तो भी दिल धड़क जाता है.
ना
जाने क्या कमी है मुझमें, ना जाने क्या
खूबी है उसमें,वो मुझे याद
नहीं करती, मैं उसको भूल
नहीं पाता!!
अल्फ़ाज़
के कुछ तो कंकर फ़ेंको, यहाँ झील सी
गहरी ख़ामोशी है।
मुमकिन नहीं शायद
किसी को समझ पाना… बिना समझे
किसी से क्या दिल लगाना!!
आज
उस की आँखों मे आँसू आ गये,वो बच्चो को
सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है….
हुस्न
वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का,बड़ी सादगी
से कहते है मजबूर थे हम….
किसी
को प्यार करो तो इतना करों की उसे जब भी प्यार मिलें… तो तुम याद आओ….
एक “सफ़र” ऐसा भी होता है दोस्तों……जिसमें “पैर” नहीं “दिल” थक जाता है…
किसी को चाह कर ना
पाना दर्द देता है, लेकिन पाकर
खो देना जिँदगी तबाह कर जाता है…..!
तू मुझमें पहले भी
था ,तू मुझमें अब
भी है… पहले मेरे
लफ्जों में था अब मेरी खामोशियों में है।
कभी
पिघलेंगे पत्थर भी मोहब्बत की तपिश पाकर,बस
यही सोच कर हम पत्थर से दिल लगा बैठे..
तेरे
रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल..जिनके चाहने वाले ज्यादा हो..वो अक्सर
बे दर्द हुआ करते हैं
कुछ
रिशते ऐसे होते हैं..जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
Life में
एक partner होना जरुरी
है. वर्ना दिल की बात status पर लिखनी
पड़ती है…!!
बहुत अज़ीब होती है
ये यादें भी मोहब्बत की..जिन पलों में हम रोए थे,उन्हें याद करके हमें हसीं आती है…और जिन पलों में हसें थे ..उन्हें याद करके
रोना आता है॥
जान लेने पे तुले हे दोनो मेरी..इश्क हार नही
मानता..दिल बात नही मानता।
एक
याद है तेरी जो सम्भाली नहीं जाती,एक
क़र्ज़ लिया जो अदा हो नहीं सकता….
मैं
क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ…वो उतनी ही
कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…
औकात नही थी इस दुनिया में किसी की जो हमारी कीमत लगा
सके…लेकिन
प्यार में पड गया
आखिर और मुफ़्त में खुद बिक गया
तुम्हारे बाद मेरा
कौन बनेगा हमदर्द.. मैंने अपने भी खो दिए.. तुझे पाने की ज़िद में….
होठों की हँसी को ना
समझ हक़ीक़त-ए-जिंदगी,
दिल में उतर के देख हम कितने उदास है..
तेरी आरज़ू मेरा
ख्वाब है, जिसका रास्ता
बहुत खराब है, मेरे ज़ख्म
का अंदाज़ा ना लगा, दिल का हर
पन्ना दर्द की किताब है।
वही रिश्ता, वही नाता, वही
मैँ और वही तुम,बस अब वक्त
ना रहा तेरे पास इजहार-ए-मोहब्बत के लिए…
इस दुनिया के लोग भी
कितने अज़ीब हैं … सारे खिलौने
छोड़ कर जज़्बातों से खेलते हैं…
हँसते रहने की आदत
भी कितनी महँगी पड़ी हमें…छोड़ गया वो
ये सोच कर कि…हम दूर रह कर
भी खुश हैं!!
अब इश्क भी करो तो ज़ात पूछकर करना, यारो मज़हबी झगड़ो में
मोहब्बत हार जाती है…
कितने दिन गुजर गए
और तुमने याद तक ना किया.. मुझे नहीं पता था..की इश्क में छुट्टिया भी होती है